महाराष्ट्र

IPS अधिकारी विश्वास नांगारे पाटिल के भाषण पर विवाद, कांग्रेस ने जांच और स्पष्टता की मांग की

Kavita2
26 Jun 2026 10:38 AM IST
IPS अधिकारी विश्वास नांगारे पाटिल के भाषण पर विवाद, कांग्रेस ने जांच और स्पष्टता की मांग की
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Maharashtra महाराष्ट्र: आईपीएस अधिकारी विश्वास नांगारे पाटिल के एक सार्वजनिक कार्यक्रम में दिए गए कथित भाषण को लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है। महाराष्ट्र कांग्रेस ने इस पूरे मामले की जांच की मांग करते हुए सवाल उठाया है कि क्या यह उनके सेवा नियमों और तटस्थता के सिद्धांतों के अनुरूप है।

जानकारी के अनुसार, यह मामला उस वीडियो से जुड़ा है जो गुरुवार को सोशल मीडिया पर वायरल हुआ। वीडियो में नांगारे पाटिल को सकल हिंदू समाज द्वारा आयोजित एक हिंदू सम्मेलन में संबोधन करते हुए दिखाया गया है। इस कार्यक्रम में उनके द्वारा कथित रूप से राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की प्रशंसा किए जाने को लेकर विवाद शुरू हो गया है।

कांग्रेस का कहना है कि एक वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी द्वारा किसी वैचारिक संगठन की सार्वजनिक रूप से प्रशंसा करना उनकी निष्पक्षता और सेवा आचरण नियमों पर सवाल खड़ा करता है। पार्टी ने इस मामले में प्रशासनिक जांच की मांग की है।

यह भी बताया जा रहा है कि आईपीएस अधिकारी विश्वास नांगारे पाटिल को हाल ही में इस सप्ताह की शुरुआत में नागपुर पुलिस आयुक्त के रूप में नियुक्त किया गया है। ऐसे में इस विवाद ने प्रशासनिक हलकों में भी चर्चा बढ़ा दी है।

कांग्रेस ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ पर पोस्ट करते हुए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, जो गृह विभाग भी संभालते हैं, से इस मामले पर स्पष्टता देने की मांग की है। पार्टी ने पूछा है कि क्या अधिकारी ने इस कार्यक्रम में शामिल होने से पहले आवश्यक अनुमति ली थी या नहीं।



विपक्ष का कहना है कि यदि किसी वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने आधिकारिक पद पर रहते हुए किसी संगठनात्मक या वैचारिक कार्यक्रम में भाग लिया है, तो यह सेवा नियमों के पालन से जुड़ा गंभीर मुद्दा हो सकता है। इसलिए इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच आवश्यक है।

वायरल वीडियो में दिखाई गई गतिविधियों को लेकर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कुछ लोग इसे व्यक्तिगत अभिव्यक्ति का हिस्सा बता रहे हैं, जबकि विपक्ष इसे प्रशासनिक मर्यादा से जोड़कर देख रहा है।

फिलहाल राज्य सरकार या पुलिस विभाग की ओर से इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। लेकिन राजनीतिक स्तर पर इस मुद्दे ने गर्माहट पैदा कर दी है।

कांग्रेस ने कहा है कि पुलिस सेवा एक निष्पक्ष संस्था है और इसके अधिकारियों से अपेक्षा की जाती है कि वे किसी भी प्रकार की राजनीतिक या वैचारिक गतिविधियों से दूरी बनाए रखें। इसी आधार पर पार्टी ने मामले की जांच की मांग की है।

दूसरी ओर, प्रशासनिक हलकों में भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या अधिकारियों की सार्वजनिक उपस्थिति और भाषणों को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देशों का पालन किया गया था या नहीं।

फिलहाल यह मामला जांच और स्पष्टीकरण की मांग तक सीमित है और आने वाले दिनों में इस पर सरकारी स्तर पर स्थिति स्पष्ट होने की संभावना है।

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